June 03, 2024

रसवंती

ये आँखें जो हैं नम पड़ीं
वो दूर तक नशे में हैं
जो दिख रहा है उस डगर
सब दूर तक नशे में है

क्या ज़मी? है क्या समा?
क्या है ये ढुलता कारवाँ?
धुत्त! इक सिरे में है
और दूर तक नशे में है

दर ब दर होड़ है
जहाँ में चारों शोर है
कौन किस समय में है
सब दूर तक नशे में है

नींद की ही आग में
या मधुकाओं की बाग में
कौन कि विषय में है?
सब दूर तक नशे में है

जा रही घड़ी में जो
या हो रहे स्वपन में हो
सब सने समय में हैं
और अब समय नशे में है

नींद-घन जो छा रही
मधु के बूंद ला रही
ये बूंद जिस गले में है
वो दूर तक नशे में है

ये झूमती निगाह है
हर जिसको इस्की चाह है
वो डोलते हृदय में है
और दूर तक नशे में है

कौन सी ये चाल है
सौ हिर्नियों की ताल है
चलीं भी उस पते पे हैं
जो दूर तक नशे में है

क्या ख़्वाब या ख़्याल है
ये नींद भरी प्याल है
सुरूर कहकशे में है
सब दूर तक नशे में है

छलकती हर घटा से जो
महकती हर दिशा में है
जो है खड़ा इन राहों में
वो दूर तक नशे में है

रसवंतिका की डोर है
ना कोई इसका तोड़ है
जो खो गया, मज़े में है
बस दूर तक नशे में है

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