June 03, 2024

भूल जाएँ

हैं कितने तुम्हारे ख़्यालाना 

जो तुम्हारा ग़म समझते हैं

कि तुम्पर गुजरे ग़म को भी 

अपना ग़म समझते हैं


पर हाल भी देखो कैसा है

तुम कहती हो ' जी ऐसा है:

आप मेरे ख़्याल भुला दीजे

अरमानों को गॅंवा दीजे

भूल जाएँ अगर, बेहतर होगा '

पर कैसे कहूँ यह बात मैं 

दर्द दिखता नहीं, मगर होगा


चलो फिर भी जाने देते हैं

दर्द तुम्हारा है ना, तो सताने देते हैं


थे तुम्हारी याद में पड़े

साथ हम अपने ग़म के

ख़्याल हुआ ग़म का तेरे

बाद भी अपने ग़म के


पहले अदा की जो तुमने

लिया वो ग़म कर ख़तम तुमको

देखो क्या हसीन शिकायत है

मेरे ग़म को देख हो रहा ग़म तुमको


भूल जाइये क़िस्सा

पर ना चाहा है कम उसे

अब है खुशी उसकी कि

भूल जाएँ हम उसे |


बेदिली!

क्या वास्ते उसके ग़म के, 

ग़म अपना भी भूल जाएँ ? 

हाँ! खुशी हो उसकी जिसमें 

हर खुशी वो क़ुबूल जाएँ ।


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