June 03, 2024

हम जो थे सो हैं नहीं

 शौक - ओ - शख़्स की भीड़ में, हम जो थे सो हैं नहीं

तुम किसी के हो गए , और हम किसी के हैं नहीं |


क्या गिला थी, क्या वजह? यूँ बिछड़ते हैं नहीं

वो उस गली निकल गए, हम जिस गली के हैं नहीं । 


जहाँ को चलते आगए, वहाँ से लौटते नहीं

तुम उस ज़मीं पे आगए, हम जिस ज़मीं के थे नहीं । 


जो प्रेम सिलसिले वो थे, वो सिलसिले ही थे नहीं

पुरानी यादों के हो तुम, कोई ख़्वाब बन चुके नहीं । 


है कुछ पलों का शोरगुल, ये बात क्यों कही नहीं? 

वफ़ा - ओ - दिल की बात थी, अब बात भी रही नहीं। 


साथ के सफ़र में थे, अब साथ का सफ़र नहीं

छत जो बन रही थी वो, अब है किसी के सर नहीं। 


हैं रंग घुलते शहरों में, बेरंगों की ख़बर नहीं

तुम नए पतों से डर रहे, हम नए पतों के दर नहीं |

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