June 23, 2024

महानर

जो महानर बनना चाहते हो , 
इसमें तन मन झुलसाते हो |

उस पार पहुँचना चाहते हो , 
जैसे महाबुद्ध की भाँति हो |

तुमने श्रम और कई त्याग किए , 
कई ग्रंथों पर भी जाप किए |

हर गुरुओं का सत्कार करा , 
खर महीधर तक को पार करा |

घनघोर तप और खोज में लीन, 
तुम महाज्ञान के बोझ अधीन |

पग पग ये खोज जो जारी है , 
बुध बनने की तैयारी है |

ब्रह्माण्ड सकल तुम चाहते हो , 
कारणतः ज्ञान अरजाते हो |

जर मुट्ठी में जो भरलो तुम , 
उतना ज्ञान अर्जन करलो तुम |

पांडित्य प्रखर अपना करलो , 
गंगा में देह तुम दाह करलो |

तुम सच को वशना चाहते हो ,
खुद को ज्ञाता बतलाते हो |

आओ अपनी सीमा लांघ दिखाओ , 
ज्ञानी तुम सच को बांध दिखाओ |

और अब कुछ मुनिगण बोलेंगे , 
पिटारे सब अपनी खोलेंगे |

कि हाँ सत किसने जाना है , 
ब्रह्म-सत सबको अनजाना है |

सब ढोंगी ढोंग ही बाँट रहे , 
सब खुदमें खुदको काट रहे |

ये नभ गगन आधृत करदो, 
मनस भूप्रांत खंडित करदो |

जंजाल में लिपटा ध्यान मगन , 
असत्य सत्य में है उलझा मन |

किसका शिक्षक अब कौन बने ? 
किस महाविद्या में कौन रमे ? 

कैसे कौन सच को पाते हैं ? 
क्या मर्यादा अपनाते हैं ? 

क्या महाविष्णु रूप सत है ? 
किस धर्मवाद की जय सत है ? 

तुम कौनसे ज्ञान को समझोगे ? 
किस रीत - रिवाज को भांजोगे ? 

चढ़ना है हिमगिरी शीत अगर , 
उनमें कौन महारणजीत मगर ? 

"आ तुझको सच बतलाता हूँ ", 
ये कहकर सब झुठलाता हूँ |

मन मूँद नयन कुछ जान रहे , 
कोई ईश्वर है, सब मान रहे |

हर ईंट से ईंट बजालो तुम , 
सब कुछ करके सब पा लो तुम |

पर जिस दिन सच को जानोगे , 
हर सच को झूट भी मानोगे |

सब पढ़कर सब कुछ छोड़  चलो , 
तुम खुदमें खुदको मोड़ चलो |

पर फिर भी, 

'अहं' को 'अहं' से अलगारेंगे, 
एक जीतेगा, सब हारेंगे |
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