June 23, 2024

मधुबनी गीत पुराना

मधुबनी गीत पुराना

वो दर्द कहाँ, वो ज़ोर कहाँ 
जो किस्सा मेरा गाता होगा?
मस्त गगन में भटक गए,
ये किस किस को सुनाता होगा?

ना पीर बड़े ,ना ऐब बड़ा था
छोटी मेरी कहानी थी।
(राग सुबध, नवनीत गगन)
ये बातें बड़ी पुरानी थी।
हम बढ़े चले मज़बूत लगन से
अचरज कठिन जवानी थी।
वो पीर बड़ा, वो संत महान
जिसने ये सुध-बुध जानी थी।

मनराग रीत में लीन चला चल
कोकिल बात सुनाती थी।
अंजान फेर, अंधेर पड़े बस
भूल-निर्मित कहानी थी।
प्रीत मिले या शीत मिले
पर ख़ून जलाना सीखा था।
इनाम शिखर, शमशीर मिले
हर चूक भुलाना सीखा था।
हम आग लगन में बड़े हुए,
निर्भीक! तपन में खड़े हुए,
मसरूफ़ अगन से काम किया।
कमज़र्फ़ बड़े पर नाम किया।
बख्शीश तुम्हारा हिस्सा होगा,
कर्म हमारा किस्सा होगा।
गीत मिला फिर रीत मिला,
हमने तब लिखना सीखा था।
मनधीर डगर से उखड़ गया,
पर चाँद का सपना फीका था।
काश! रात ने बीर सहर पर 
मान हमारा रक्खा होता।
मान हमारा रखते तो,
इमान हमारा पक्का होता।
बढ़े चले, हम बढ़े चले
फिर मधुबन रात दिवानी होगी।
कालकोट के चीर शिखर पर
हासिल नयी कहानी होगी।
काल-नौक के नीर डगर पर
हमदम बड़े पुराने होंगे।
शाख-तिलक पर पड़े पड़े
फिर बातें वही पुरानी होंगी।

वक्त माँगता माँग पुरानी 
पल पल चलना जारी है।
त्याग नींद अब भोर पहर में 
रमने की तैयारी है।
खोल नयन देखा था सपना 
मधुबन रात सुहानी थी।
पर बढ़े चले, अब बढ़े चले
वो मधुबन सिर्फ़ कहानी थी।

धीर नगर हम छोड़ चले,
उन गलियों से मुख मोड़ चले,
हम बढ़े चले, हम बढ़े चले,
फिर मधुबन रात दिवानी होगी।
कर्म हमारा किस्सा होगा।
शूर भरी जवानी होगी।
शाख-तिलक पर मिलकर तुमसे 
बातें वही पुरानी होंगी।

हम ओढ़ पीत और राख लगाकर 
संतों के संग चले गए।
कुछ गलत किया, कुछ सही किया
हम दोनों कर के चले गए।

 - राज आर्यन
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